अनाथालय और गौसेवा को सम्र्पित संत को नही मिल रहा है अपेक्षित सहयोग

सुविख्यात विचारक जार्ज ग्रिटर का मत है ‘‘जिम्मेदारी जब हमारे दिल की इच्छा भी बन जाती है, तो संतोष और खुशी दोनों मिलती है। एैसी ही खुशी का एहसास श्री महन्त अनुपमानन्द गिरी जी महाराज को उस वक्त हुआ जब उन्होने अनाथ बच्चो और भारतीय संस्कृति की पुज्य गाँय और उसके वंश के संरक्षण व बच्चो के भरण-पोषण का संकल्प लेकर गृहस्थ आश्रम का त्याग कर एक प्रयास प्रारम्भ किया।

MAharaj ji serving Hariom Ashram.

Maharaj ji serving Hariom Ashram.

धर्म की मूल सच्चाई को जानकर भगवाधारी बने श्री नौरती सिंह को संत समाज से अनुपमानन्द नाम मिला। संत महात्मा जिन्हे हम विभिन्न धर्माे का संस्थापक मानते है, कभी कोई धर्म स्थापित नही करते वे सम्पूर्ण मानव जाति का कल्याण करने आते है। धर्म अपने स्वार्थ के लिए मतलब साधने का नाम नही है सच्चे धर्म के अर्थ को समझकर ही श्री अनुपमनन्द गिरी जी महाराज ने 10 साल पूर्व उत्तराखण्ड के कारबारी ग्रान्ट, शिमला रोड, देहरादून में शहर से 15 किमी दूर हरिओम आश्रम ट्रस्ट के साथ में सेवा कार्य की शुरुआत की थी।
देखते ही देखते महाराज श्री ने यह साबित कर दिखाया की चरित्रवान लोग जिम्मेदारियो को कबूल करते है व खतरे भी लेते है और अपने साथ ही सकल समाज की तकदीर व तसवीर को भी बदलते है। हालाकि जिम्मेदारी कबूल करने पर खतेर भी बढतेे है और उन्हे सहना पडता है, साथ ही इन सब के प्रति जवाब देह भी हेना पडता है।
महाराज श्री के अनुसार केवल गौ माता की जय बोलने से या बडी बडी गौ कथाए करने से गौ वंश पर हो रहे अत्याचार कम नही हो सकते। गौवंश पर अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करनी है तो गौशालाओ का संचालन व उनका भरण पोषण और संरक्षण ही एकमात्र तरीका है। गौवंश यदी मिटा तो देश की संास्कृतिक पहचान भी मिट जाएगी। इसके लिए केवल हिन्दु धर्मावल्मबियो को ही नही बल्की सकल मानव समाज को जाग्रत होना पडेगा।
महाराज श्री ने सेवाकार्य करते हुए सर्वप्रथम निरा़िश्रत गईयो के लिए गौशाला और एक छोटे से अनाथालय की स्थापना की, उस वक्त महाराज श्री अकेले ही सेवा में लगे रहते थे। 4-5 गईया रही होंगी और 2-3 अनाथालय के बालक धीरे-धीरे महाराजश्री की सेवा ऐसा रंग लाने लगी की सेवार्थियो का पूरा एक कारवां बनता चला गया। अपने विचारो में महाराज श्री कहते है- ‘‘धमार्थ कार्य पर परमात्मा कि कृपा से संकल्प लेकर और पवित्र मन से चला तो अकेला था, और पता भी नही चला की कब और कैसे कारवां बनता चला गया। सैकड़ो बालको और सैकड़ो गईयो के लिए समस्त व्यवस्था करने के लिए परमात्मा ने मुझे साधन बना रखा है, न जाने कहा से वो व्यवस्था कर देता है पर आवश्यकता अनुसार अभी भी संसाधनो का अभाव मुझे अखरता है। सरकार और कथित गौभक्त बडे़-बडे़ वायदे और दावे तो करते है पर धरातल पर सच्चाई आज भी शून्य के धरातल पर खडी है। गौशाला के लिए जो दे रही है व ऊटँ के मुँह मे जीरे के समान है।’’

विद्या ददाति विनियम

हमारे ग्रन्थो मे लिखा है कि विद्या ददाति विनियम अर्थात विद्या आने पर विनय आता है। किंतु आज की शिक्षा प्रणाली से शिक्षित बच्चो के अन्दर न जाने कौन सी विद्या डाली जा रही है कि विनय आता ही नही, सहनशिलता आती ही नही। बडे बडे विद्यालयो और काॅलेजो में पढने वाले श्रेष्ठ बच्चो के अन्दर भी विनयता और भारतीय संस्कृति और सभ्यता दिखलाई नही पडती, यह दोष सरकार का तो है ही साथ ही अभिभावको के भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराना उचित ही होगा। घरवालो के थोडा सा डाटने पर न जाने क्या क्या अनहोनियाॅ हो रही है। समाचार पत्र आय दिनो ऐसी कितनी ही खबरो से भरे पडे रहते है।

view of Hariom Ashram

view of Hariom Ashram

शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु महाराजश्री ने विद्यालय की भी नीव रखी। उनका मानना है की भौतिक और अध्यात्मिक दोनो ही प्रकार की शिक्षा एक साथ देना जरुरी है ताकी बच्चो को आज के दौर के हिसाब से तैयार किया जा सके और अध्यात्म से समाज की कुरुतीयो को हटाया जा सके। केवल भौतिक ज्ञान ही काफी नही है, उस ज्ञान को सही दिशा देेने के लिए अध्यात्म भी जरुरी है।
गौशाला, अनाथालय और विद्यालय के अलावा और भी धर्म कार्य जैसे- पौधा-रोपण, गरीब लड़कीयो का विवाह, निःशुल्क भण्डारे, गरीब बस्तीयों मे कम्बल वितरण, आदि।
उत्तराखण्ड के देहरादून जनपद मे सूदूर कारबारी ग्रान्ट, शिमला रोड़, स्थापित श्री बालाजी अनाथालय, एवं पुज्य दादी माँ रामप्यारी गौ सेवा सदन का संचालन जैसे-तैसे हो तो रहा है परन्तु सरकारी स्तर पर किसी तरह का कोई सहयोग नही मिल पा रहा है। हाल ही में शिमला रोड़ व आश्रम के बीच बरसाती नदी में आए पानी के उफान ने आश्रम द्वारा बनाए गए बल्लीयों के पुल तबाह और बरबाद कर दिया जिस कारण पानी के तेज बहाव के बीच से आना और जाना दूषवार हो गया है।

विडंबना तो यह…..

विडंबना तो यह है कि अपने आप को जनप्रतिनिधि कहलाने वाले लोग भी आश्रम की परेशानीयो को नजरअंदाज कर रहे है। पुल के बह जाने के कारण क्षेत्रीेये विधायक श्री सहदेव पुण्डीर से गुहार लगाई गई तब उन्होने इससे पल्ला झाडते हुए पार्थना पत्र को जिलाधिकारी को अग्रसारित कर दिया। आश्रम की अति आवश्यक जरुरतो को लेकर शासन-प्रशासन को बारमबार लिखे जाने के बावजूद कही से कोई मदद नही मिल पा रही है।
दुखद स्थिती तो यह है कि फरवरी 2014 में आश्रम की कन्या सरस्वती डोली की शादी हेतु दस हजार रुपये का अनुदान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वीकृत किया था जो आज तक सचिवालय और बिजापुर गेस्ट हाऊस के चक्कर काटने के बाद नही मिला।
प्रस्तुति:- प्रमोद भारती, स्वतंत्र पत्रकार, देहरादून 9412558405

सम्पर्क:- हरिओम आश्रम कड़वापानी, कारबारी ग्रान्ट, शिमला रोड देहरादून। 9897504931
website – www.hariomashram.com
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  • True saying. . . And doing such a great job in dehradun.. .great.. .
    Regards,
    Palopus® team.

    • Dhanyawad. HARIOM ASHRAM, DEHRADUN me aapki puri team ka swagat hai..:)

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