अनाथालय और गौसेवा को सम्र्पित संत को नही मिल रहा है अपेक्षित सहयोग

सुविख्यात विचारक जार्ज ग्रिटर का मत है ‘‘जिम्मेदारी जब हमारे दिल की इच्छा भी बन जाती है, तो संतोष और खुशी दोनों मिलती है। एैसी ही खुशी का एहसास श्री महन्त अनुपमानन्द गिरी जी महाराज को उस वक्त हुआ जब उन्होने अनाथ बच्चो और भारतीय संस्कृति की पुज्य गाँय और उसके वंश के संरक्षण व Read more about अनाथालय और गौसेवा को सम्र्पित संत को नही मिल रहा है अपेक्षित सहयोग[…]